दिल्ली के जंतर–मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक ने कथित NEET परीक्षा पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों के समर्थन में 21 दिनों तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की। यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग को लेकर चलाया गया।
आंदोलन की प्रमुख मांगें
भूख हड़ताल के दौरान आंदोलनकारियों ने मुख्य रूप से निम्न मांगें उठाईं:
- NEET सहित प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक की निष्पक्ष जांच।
- शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना।
- परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार।
- जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग।
- छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए सख्त व्यवस्था लागू करना।
21 दिनों तक जारी रहा अनशन
रिपोर्टों के अनुसार, सोनम वांगचुक ने जून के अंत में जंतर-मंतर पर अपना अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। 21वें दिन उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस और चिकित्सा टीम ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। अधिकारियों का कहना था कि यह कदम चिकित्सकीय सलाह के आधार पर उठाया गया, जबकि आंदोलन से जुड़े लोगों ने इसका विरोध किया।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
लगातार उपवास के कारण उनकी तबीयत को लेकर चिंता बढ़ गई। अदालत ने भी उनके स्वास्थ्य की निगरानी और आवश्यक चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बाद में उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रखा गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी रहा।
‘चलो संसद‘ अभियान
भूख हड़ताल के साथ आंदोलनकारियों ने “चलो संसद“ अभियान का भी आह्वान किया, जिसका उद्देश्य संसद के समक्ष शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाना था। आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हुए।
सोनम वांगचुक की शर्तें
अस्पताल से जारी संदेशों में सोनम वांगचुक ने कहा कि वे अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे यदि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार जवाबदेही स्वीकार करे या संसद में इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा और कार्रवाई का आश्वासन मिले।
निष्कर्ष
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की 21 दिनों की भूख हड़ताल ने शिक्षा व्यवस्था, कथित NEET पेपर लीक, परीक्षा सुधार और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया। आंदोलन ने छात्रों की चिंताओं को प्रमुखता से सामने रखा और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा विश्वास बहाल करने की मांग को व्यापक समर्थन दिलाया।